भारत को अगर मेलों का देश कहा जाए, तो यह गलत नहीं होगा। यहां हर राज्य, हर क्षेत्र और हर समुदाय के अपने पारंपरिक मेले हैं, जो न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुडें होते हैं बल्कि भारत की समृद्ध संस्कृति और सामाजिक एकता को भी दर्शाते हैं। भारत में लगने वाले मेले लोगों को जोडने, परंपराओं को जीवित रखने और लोक संस्कृति को आगे बढाने का काम करते हैं।

Indian Mela's In 2026
भारत के बडें मेले



२०२६ में भारत के मेले खास इसलिए भी हैं, क्योंकि इस वर्ष कई बडें और ऐतिहासिक मेलों का आयोजन होने वाला है, जिनमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक शामिल होते हैं। ये मेले सिर्फ धार्मिक यात्राओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संस्कृति, कला, भोजन और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी एक बेहतरीन अनुभव होते हैं।

यह ब्लोग विशेष रूप से पर्यटकों, श्रद्धालुओं, फोटोग्राफरों, और उन सभी लोगों के लिए उपयोगी है जो २०२६ में भारत के बडें मेलों में शामिल होने की योजना बना रहे हैं।


• २०२६ में होने वाले भारत के बडें मेले:


१. फरवरी २०२६ में लगने वाले मेले:

सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला (हरियाणा) - भारत का सबसे प्रसिद्ध क्राफ्ट मेला

खजुराहो नृत्य महोत्सव (मध्य प्रदेश) - शास्त्रीय नृत्य और सांस्कृतिक आयोजन

ताज महोत्सव (आगरा, उत्तर प्रदेश) - कला, संस्कृति और मुगल विरासत


२. मार्च २०२६ में लगने वाले मेले:

मेदिनीपुर चारक मेला (पश्चिम बंगाल) - पारंपरिक लोक अनुष्ठान

डोल जात्रा / होली मेले (पूर्वी भारत) - रंगों और भक्ति का उत्सव

कपालीश्वर मंदिर ब्रह्मोत्सव (तमिलनाडु)


३. अप्रैल २०२६ में लगने वाले मेले:

चैत्र नवरात्रि मेले (उत्तर भारत) - देवी मंदिरों में विशेष आयोजन

बिसु मेला (उत्तराखंड) - स्थानीय संस्कृति और परंपरा

माधवपुर मेला (गुजरात) - राम-सीता विवाह से जुडा धार्मिक मेला


४. मई-जून २०२६ में लगने वाले मेले:

गंगा दशहरा मेले (उत्तर भारत)

बुद्ध पूर्णिमा मेले (बिहार, यूपी)

शीतला माता मेले (राजस्थान, यूपी)


५. जुलाई-अगस्त २०२६ में लगने वाले मेले:

श्रावण मास के कांवड मेले (हरिद्वार, देवघर)

नाग पंचमी मेले (महाराष्ट्र, राजस्थान)

तेजाजी मेला (राजस्थान)


६. सितंबर-अक्टूबर २०२६ में लगने वाले मेले:

नवरात्रि मेले (गुजरात, यूपी, एमपी)

मैसूर दशहरा मेला (कर्नाटक)

कुल्लू दशहरा मेला (हिमाचल प्रदेश)


७. नवंबर २०२६ में लगने वाले मेले:

पुष्कर मेला (राजस्थान) - ऊंट मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम

सोनपुर मेला (बिहार) - एशिया का सबसे बडा पशु मेला

कार्तिक पूर्णिमा मेले (वाराणसी, प्रयागराज)


८. दिसंबर २०२६ में लगने वाले मेले:

होर्नबिल फेस्टिवल (नागालैंड)

रण उत्सव (कच्छ, गुजरात)

क्रिसमस और न्यू ईयर फेयर (गोवा, केरल)


• इन मेलों में क्यों जाना चाहिए?


भारत के ये बडें मेले आपको भारत की असली संस्कृति से रूबरू कराते हैं। यहां आपको धार्मिक और आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ लोक जीवन की झलक मिलती है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए ये मेले रंग, भावनाओं और परंपराओं से भरे होते हैं। इसके अलावा, स्थानीय लोक भोजन और हस्तशिल्प खरीदने का अवसर भी मिलता है।


• २०२६ में मेले घूमने के लिए यात्रा टिप्स:


✓ होटल और ठहरने की व्यवस्था:

मेले में जाने से पहले होटल या धर्मशाला की बुकिंग जरूर करें।

✓ सुरक्षा और भीड प्रबंधन:

भीडभाड वाले इलाकों में सावधानी रखें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

✓ सही समय पर यात्रा की योजना:

प्रमुख स्नान या मुख्य दिनों से पहले पहुंचना बेहतर रहता है।

✓ स्थानीय नियम और परंपराएं:

स्थानीय संस्कृति और नियमों का सम्मान करें।


• विदेशी और अन्य राज्यों के पर्यटकों के लिए सुझाव:


यात्रा के दौरान जरूरी दवाइयां, पहचान पत्र और नकद पैसे साथ रखें। भाषा की समस्या से बचने के लिए स्थानीय गाइड लेना उपयोगी हो सकता है। साथ ही, पहले से बजट प्लानिंग करने से यात्रा आसान और सुरक्षित रहती है।



२०२६ में भारत के मेले इसलिए खास हैं, क्योंकि ये आपको एक ही जगह भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता दिखाते हैं। अगर आप भारत को सही मायनों में समझना चाहते हैं, तो इन मेलों में शामिल होना जरूर चाहिए। सही प्लानिंग और तैयारी के साथ आपकी यह यात्रा यादगार बन सकती है।